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शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है?*

 *शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है?* नवग्रहों में शनिदेव को दण्डाधिकारी का स्थान दिया गया हैं। वे मनुष्य हो या देवता, राजा हो या रंक, पशु हो या पक्षी सबके लिए उनके कर्मानुसार दण्ड का विधान करते हैं; लेकिन जब स्वयं न्यायाधीश ही गलती करे तो परमात्मा ही उसके लिए दण्ड तय करता हैं। ऐसा ही कुछ शनिदेव और रामभक्त हनुमान के प्रसंग में देखने को मिलता हैं। भारतीय संस्कृति में स्वयं को बड़ा नहीं माना जाता, बल्कि दूसरों को बड़ा और आदरणीय मानने की परम्परा रही हैं। अभिमान (घमण्ड, दर्प, दम्भ और अहंकार) ही सभी दु:खों व बुराइयों का कारण हैं। जैसे ही मनुष्य के हृदय में जरा-सा भी अभिमान आता है, उसके अन्दर दुर्गुण आ जाते हैं और वह उद्दण्ड व अत्याचारी बन जाता हैं। लंकापति रावण चारों वेदों का ज्ञाता, अत्यन्त पराक्रमी और भगवान शिव का अनन्य भक्त होते हुए भी अभिमानी होने के कारण समस्त कुल सहित विनाश को प्राप्त हुआ। परमात्मा भी विनम्र व्यक्ति से ही प्रसन्न होते हैं– लघुता से प्रभुता मिलै, प्रभुता से प्रभु दूर। चींटी शक्कर लै चली हाथी के सिर धूर।। तुलसीदासजी (राचमा, उत्तरकाण्ड ७।७४।५-६) में कहते हैं– सुनहु ...

*🍚क्या हैं माखन और मटकी🏺🏮*

 *🍚क्या हैं माखन और मटकी🏺🏮* भगवान जब चलने लगे तो पहली बार घर से बाहर निकले. ब्रज से बाहर भगवान की मित्र मंडली बन गयी। सुबल, मंगल, सुमंगल, श्रीदामा, तोसन, आदि मित्र बन गये. सब मिलकर हर दिन माखन चोरी करने जाते। चोर मंडली के अध्यक्ष स्वयं माखन चोर श्रीकृष्ण थे, सब एक जगह इकट्टा होकर योजना बनाते कि किसगोपी के घर चोरी करनी हैं, आज ‘चिकसोले वाली’ गोपी की बारी थी भगवान ने गोपी के घर के पास सारे मित्रों को छिपा दिया और स्वयं उसकेघर पहुँच गये। दरवाजा खटखटाने लगे, भगवान ने अपने बाल और काजल बिखरा लिया. गोपी ने दरवाजा खोला, तोश्रीकृष्ण को खड़े देखा गोपी बोली– ‘अरे लाला! आज सुबह-सुबहयहाँ कैसे?कन्हैया बोले– ‘गोपी क्या बताऊँ! आजसुबह उठते ही, मैया ने कहा लाला तू चिकसोले वाली गोपी के घर चले जाओ और उससे कहना आज हमारे घर में संत आ गए है मैंने तो ताजा माखन निकला नहीं, चिकसोले वाली तो बहुत सुबह ही ताजा माखन निकल लेती है उनसे जाकर कहना कि एक मटकी माखन दे दो, बदले में दो मटकी माखन लौटा दूँगी। गोपी बोली– लाला! मैं अभी माखन की मटकी लाती हूँ और मैया से कह देना कि लौटने की जरुरत नहीं हैं संतो की सेवा मेरी...

देवी पार्वती के जन्म की संपूर्ण कथा

 *देवी पार्वती के जन्म की संपूर्ण कथा* दक्ष प्रजापति की सभी पुत्रियां गुणवती थीं। फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्ति-संपन्न हो एवं सर्वविजयिनी हो। अत: दक्ष एक ऐसी ही पुत्री के लिए तप करने लगे। तप करते-करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा, 'मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं। तुम किस कारण तप कर रहे हो? दक्ष ने तप करने का कारण बताया तो मां बोली मैं स्वयं पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी। मेरा नाम होगा सती। मैं सती के रूप में जन्म लेकर अपनी लीलाओं का विस्तार करूँगी। फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया। सती दक्ष की सभी पुत्रियों में सबसे अलौकिक थीं। सती ने बाल्यावस्था में ही कई ऐसे अलौकिक आश्चर्य चकित करने वाले कार्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मय होता था । जब सती विवाह योग्य हो गई, तो दक्ष को उनके लिए वर की चिंता होने लगी। उन्होंने ब्रह्मा जी से इस विषय में परामर्श किया। ब्रह्मा जी ने कहा, सती आद्या की अवतार हैं। आद्या आदि शक्ति और शिव आदि पुरुष हैं। अतः ...

प्रभु श्री राम चन्द्र जी कैसे इस लोक को छोड़कर वापस विष्णुलोक गए।*

 *प्रभु श्री राम चन्द्र जी कैसे इस लोक को छोड़कर वापस विष्णुलोक गए।* भगवान श्री राम के मृत्यु वरण में सबसे बड़ी बाधा उनके प्रिय भक्त हनुमान थे। क्योंकि हनुमान के होते हुए यम की इतनी हिम्मत नहीं थी की वो राम के पास पहुँच चुके पर स्वयं श्री राम से इसका हल निकाला। आइये जानते हैं कैसे श्री राम ने इस समस्या का हल निकाला। एक दिन राम जी जान गए कि उनके दैह त्यागने का समय हो गया था। वह जानते थे कि जो जन्म लेता है उसे मरना पड़ता है। “यम को मुझ तक आने दो। मेरे लिए वैकुंठ, मेरे स्वर्गिक धाम जाने का समय आ गया है”, उन्होंने कहा। लेकिन मृत्यु के देवता यम अयोध्या में घुसने से डरते थे क्योंकि उनको राम के परम भक्त और उनके महल के मुख्य प्रहरी हनुमान से भय लगता था। यम के प्रवेश के लिए हनुमान को हटाना जरुरी था। इसलिए राम ने अपनी अंगूठी को महल के फर्श के एक छेद में से गिरा दिया और हनुमान से इसे खोजकर लाने के लिए कहा। हनुमान ने स्वंय का स्वरुप छोटा करते हुए बिलकुल भंवरे जैसा आकार बना लिया और केवल उस अंगूठी को ढूढंने के लिए छेद में प्रवेश कर गए, वह छेद केवल छेद नहीं था बल्कि एक सुरंग का रास्ता था जो सांपों ...

शिवाजी महाराज की जयंती

 *शिवाजी महाराज की जयंती आज* महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती को शिवाजी जयंती के रूप में मनाया जाता हैं। हर साल शिवाजी जयंती 19 फरवरी को पूरे महाराष्ट्र राज्य में बहुत उत्साह और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह महाराष्ट्र के लोगों के लिए एक सार्वजनिक अवकाश हैं। 19 फरवरी, 1630 को, शिवनेरी किले में, शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। शिवाजी जयंती 2022 - छत्रपति शिवाजी का 392वां जन्म दिवस तारीख - शनिवार, 19 फरवरी 2022 इस दिन, लोग शिवाजी और उनके सहयोगियों के रूप में तैयार होते हैं और कई जुलूस निकालते हैं। पूरे महाराष्ट्र राज्य में इसे छुट्टी घोषित किया जाता है क्योंकि इस दिन को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। गोवा और कर्नाटक में भी, शिवाजी जयंती मनाई जाती है। लोग शिवाजी महाराज के जीवन पर नाटक करते हैं। इस दिन प्रमुख सरकारी अधिकारियों द्वारा भाषण दिए जाते हैं। ●कहानी ======= शिवाजी महाराज ने बीजापुर की घटती आदिलशाही सल्तनत से एक पूरे क्षेत्र को तराशा। यह मराठा साम्राज्य की शुरुआत बन गया। इसलिए, उन्हें सबसे बड़ा मराठा शासक माना जाता था। शिवाजी महाराज ने 16 साल की छोटी उम्र में ट...

🔺'कहानी-भगवान बचाएगा'🔺

 . 🔺'कहानी-भगवान बचाएगा'🔺      ________________________________ एक समय की बात है किसी गाँव में एक साधु रहता था, वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे बैठ कर तपस्या किया करता था उसका भागवान पर अटूट विश्वास था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे. एक बार गाँव में बहुत भीषण बाढ़ आ गई.चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे | जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप रहे हैं तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी| पर साधु ने कहा- तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!” धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता गया , और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा , इतने में वहां से एक नाव गुजरी. मल्लाह ने कहा- ” हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा ” “नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! “साधु ने उत्तर दिया. नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया. कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , ...

रिश्ते हैं प्यार के ...👭

 . रिश्ते हैं प्यार के ...👭 ________________________________ बहुत ही अनमोल कहानी... थोड़ा बड़ा पोस्ट है, पर एक बार जरूर पढ़ियेगा ।। पिताजी जोऱ से चिल्लाते हैं....... ।  मैं दौड़कर आता हू , और पूछता हु । क्या बात है पिताजी ?  पिताजी - तूझे पता नहीं है, आज तेरी बहन आ रही है ? वह इस बार हम सभी के साथ अपना जन्मदिन मनायेगी । अब जल्दी से जा और अपनी बहन को लेके आ,हाँ और सुन... तू अपनी नई गाड़ी लेकर जा जो तूने कल खरीदी है... उसे अच्छा लगेगा मैं - लेकिन मेरी गाड़ी तो मेरा दोस्त ले गया है सुबह ही... और आपकी गाड़ी भी ड्राइवर ये कहकर ले गया कि गाड़ी की ब्रेक चेक करवानी है। पिताजी - ठीक है तो तू स्टेशन तो जा किसी की गाड़ी लेकर या किराया की करके ? उसे बहुत खुशी मिलेगी । मै - अरे वह बच्ची है क्या जो आ नहीं सकेगी? आ जायेगी आप चिंता क्यों करते हो कोई टैक्सी या आटो लेकर---- पिताजी - तूझे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए? घर मे गाड़ियाँ होते हुए भी घर की बेटी किसी टैक्सी या आटो से आयेगी? मैं - ठीक है आप जाओ मुझे बहुत काम है मैं जा नहीं सकता । पिताजी - तूझे अपनी बहन की थोड़ी भी फिकर नहीं...

"अपनी तुलना दूसरों से न करें"🔺

 . 🔺"अपनी तुलना दूसरों से न करें"🔺   _______________________________ एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौवा रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था, लेकिन एक बार उसने जंगल में किसी हंस को देख लिया और उसे देखते ही सोचने लगा कि ये प्राणी कितना सुन्दर है, ऐसा प्राणी तो मैंने पहले कभी नहीं देखा! इतना साफ और सफेद। यह तो इस जंगल में औरों से बहुत सफेद और सुंदर है, इसलिए यह तो बहुत खुश रहता होगा।   कोवा हंस के पास गया और पूछा, भाई तुम इतने सुंदर हो, इसलिए तुम बहुत खुश होगे?   इस पर हंस ने जवाब दिया, हां मैं पहले बहुत खुश रहता था, जब तक मैंने तोते को नहीं देखा था। उसे देखने के बाद से लगता है कि तोता धरती का सबसे सुंदर प्राणी है। हम दोनों के शरीर का तो एक ही रंग है लेकिन तोते के शरीर पर दो-दो रंग है, उसके गले में लाल रंग का घेरा और वो सूर्ख हरे रंग का था, सच में वो बेहद खूबसूरत था।    अब कौवे ने सोचा कि हंस तो तोते को सबसे सुंदर बता रहा है, तो फिर उसे देखना होगा। कौवा तोते के पास गया और पूछा, भाई तुम दो-दो रं...

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